ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का।
सुख संपत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं मूढ़ खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतों की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
भगवान विष्णु की आरती का विशेष महत्व एकादशी, वैकुंठ एकादशी और गुरुवार के दिन माना जाता है। विष्णु भगवान सृष्टि के पालनकर्ता हैं और धर्म की रक्षा करते हैं। उनकी आराधना से जीवन में संतुलन, स्थिरता और संरक्षण मिलता है।
नियमित विष्णु आरती करने से मानसिक शांति और सकारात्मकता बढ़ती है। परिवार में सुख-समृद्धि आती है और संकटों से रक्षा होती है। भक्ति और सदाचार की भावना मजबूत होती है।
प्रातः या संध्या समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक, धूप, तुलसी दल और फल अर्पित करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें और श्रद्धा भाव से आरती करें। अंत में प्रसाद वितरित करें।
विष्णु भगवान की आरती भक्ति, संरक्षण और धर्म का प्रतीक है। सच्चे मन से की गई आरती जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती है।
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