॥ दोहा ॥
मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध करि, पुरवहु मेरी आस॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय जगत जननी।
जय महालक्ष्मी मंगल करनी॥
आदि शक्ति तुम जग की माता।
सर्व चराचर की विधाता॥
तुम ही विष्णु प्रिया भवानी।
जग पालन की हो कल्याणी॥
क्षीर सागर से तुम आई।
रत्नाकर की सुता कहाई॥
धन वैभव की तुम हो दाता।
सब विधि पूरण करन विधाता॥
तुम बिन जग में कुछ नहिं होता।
धनहीन नर दुखिया रोता॥
करहु कृपा हे मात भवानी।
पूरन करहु सबकी मनमानी॥
जो कोई तुमको ध्यावे।
सिद्धि संपत्ति घर में आवे॥
दरिद्र दोष सब दूर करावा।
सुख समृद्धि का मार्ग बतावा॥
गृह में शांति सदा बसावो।
कष्ट क्लेश सब दूर हटावो॥
विष्णु संग विराजत माता।
भक्तन की तुम भाग्य विधाता॥
कमलासन पर सदा विराजो।
दीन दुखी पर दया दिखाजो॥
दीपावली के दिन जो ध्यावे।
धन धान्य से घर भर जावे॥
नारि नर जो श्रद्धा लावे।
जीवन में सुख समृद्धि पावे॥
करुणा सागर जगत विख्याता।
भक्तन की तुम संकट त्राता॥
जय जय जय महालक्ष्मी माता।
करो कृपा सब पर जगदाता॥
॥ समापन दोहा ॥
जो यह पाठ करे मन लाई।
ता पर लक्ष्मी कृपा बसाई॥
सुख समृद्धि घर में आवे।
दरिद्र दोष निकट न आवे॥
लक्ष्मी धन, समृद्धि, सौभाग्य और वैभव की देवी मानी जाती हैं। लक्ष्मी चालीसा का नियमित पाठ घर में सुख-शांति और आर्थिक स्थिरता लाता है।
विशेष रूप से शुक्रवार, दीपावली और शरद पूर्णिमा के दिन इसका पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।
आध्यात्मिक और भौतिक लाभ
धन और समृद्धि की प्राप्ति
व्यापार में वृद्धि
घर में सकारात्मक ऊर्जा
आर्थिक बाधाओं से मुक्ति
सौभाग्य और वैवाहिक सुख
प्रातः या संध्या समय दीपक जलाकर पाठ करें
लाल या गुलाबी वस्त्र धारण करें
कमल पुष्प, मिठाई और खीर का भोग लगाएँ
11 या 21 बार पाठ विशेष फलदायी
शुक्रवार को विशेष पूजन करें
लक्ष्मी चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। नियमित साधना जीवन में धन, सौभाग्य और स्थिरता प्रदान करती है।
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