॥ दोहा ॥
जनक जननि पद कमल रज, निज मस्तक पर धारि।
बंदौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल देहु उधारि॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय सरस्वती माता।
सद्गुण वैभव शालिनी दाता॥
चंद्रवदनि पद्मासना धारी।
वीणा पुस्तक कर में भारी॥
श्वेत वस्त्र धारण सुहावन।
हंस वाहन शोभा मनभावन॥
ज्ञान दायिनी बुद्धि प्रकाशी।
विद्या रूप तुम्हीं अविनाशी॥
करहु कृपा जन पर माते।
निर्मल बुद्धि करहु दिन रातें॥
तुम बिनु जग में ज्ञान न होई।
अंधकार मिटे नहीं कोई॥
वेद पुरान उपनिषद गाए।
तव महिमा को पार न पाए॥
ब्रह्मा, विष्णु, शिव सब ध्यावें।
देव ऋषि मुनि शीश नवावें॥
तुम हो शारदा शुभ्र स्वरूपा।
ज्ञान सुधा की अमृत कूपा॥
मन मंदिर में वास कराओ।
मूढ़ बुद्धि को तेज दिलाओ॥
बालक जन पर कृपा तुम्हारी।
विद्या बुद्धि देहु सुखकारी॥
कला संगीत नृत्य सिखावो।
सुमधुर वाणी सदा बनावो॥
परीक्षा काल सहाय बनो तुम।
भय संशय सब दूर करो तुम॥
जो श्रद्धा से पाठ करै कोई।
निश्चय सिद्धि पावै सोई॥
भक्ति भाव से ध्यान जो धारे।
जीवन में उजियारा पसारे॥
करहु अनुग्रह हे जगदम्बा।
ज्ञान ज्योति भर दो अम्बा॥
संकट हरहु अज्ञान हमारा।
देहु विवेक प्रकाश तुम्हारा॥
सद्गुण, शील, विनय प्रदानो।
जीवन पथ को सरल बनानो॥
अंत समय जब प्राण निकलें।
नाम तुम्हार हृदय में पलें॥
॥ समापन दोहा ॥
या चालीसा जो कोई गावै।
विद्या बुद्धि सुख संपत्ति पावै॥
मातु कृपा करि ध्यान लगावै।
ज्ञान प्रकाश हृदय में आवै॥
सरस्वती चालीसा का महत्व
सरस्वती ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी मानी जाती हैं। विद्यार्थियों, कलाकारों और लेखकों के लिए सरस्वती चालीसा का पाठ अत्यंत लाभकारी है।
विशेष रूप से बसंत पंचमी और परीक्षा काल में इसका पाठ शुभ माना जाता है।
बुद्धि और स्मरण शक्ति में वृद्धि
शिक्षा में सफलता
वाणी में मधुरता
कला एवं संगीत में प्रगति
आत्मविश्वास में वृद्धि
प्रातःकाल स्नान के बाद पाठ करें
सफेद या पीले वस्त्र धारण करें
माँ सरस्वती को सफेद पुष्प अर्पित करें
विद्यार्थी परीक्षा से पहले 11 बार पाठ कर सकते हैं
बसंत पंचमी के दिन विशेष पूजन करें
सरस्वती चालीसा का नियमित पाठ जीवन में ज्ञान, विवेक और सफलता प्रदान करता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया पाठ साधक को उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर करता है।
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