सुंदरकांड के करने से नकारात्मकता समाप्त होती है इसका पाठ घर दफ्तर अथवा कम्पनी में करने से नई ऊर्जा प्राप्त होती है भूत प्रेत के साये से निजात मिलती है यदि संकट हमारे जीवन मे आ जाये बनते काम बिगड़ने लगे मेहनत के बाद भी लाभ ना मिले भूत प्रेत जैसी बाधाये आने लगे ऐसे समय सुंदरकांड का पाठ करना बहुत उत्तम माना जाता है
मंगलवार शनिवार पुर्णिमा या हनुमान जयंती विशेष फलदायी माने जाते है किसी भी पूजा में सात्विकता एव शुद्ता विशेष जरूरी है नहा धोकर अति पवित्र होकर पूर्वाभिमुख होकर पूजा करने का नियम है|
सुंदरकांड पाठ को घर में आराम से कर सकते हैं | घर का कोई भी सदस्य (पुरुष/ नारी) सुन्दरकांड का पाठ कर सकते हैं | यदि फिर भी किसी कारन से घर का सदस्य नहीं कर पा रहे है तोह किसी योग्य पंडित जी से सुन्दरकांड का पाठ करा सकते हैं | अगर आप को पंडित जी नहीं मिल रही है तो आप Astrouni से सुन्दरकांड पाठ के लिए पंडित जी बुक कर सकते है।
पहले हाथ धोकर आचमन करे अंदर बाहर से शुद्धि के बाद आसन शुद्ध कर गुरु ध्यान करे| फिर दीपक प्रज्वलित करें इनको प्रणाम के बाद स्वस्तिवाचन फिर शांति पाठ और फिर संकल्प लेकर आगे क्रम पहले गौरी गणेश फिर कलश पूजन पंच देव पूजन नवग्रह पितृ षोडश मातृका और फिर प्रधान देव (हनुमान जी )का पूजन करे उसके उपरांत सुंदरकांड का पाठ प्रारम्भ करे पाठ के बाद हनुमान चालीसा करे भोग आरती क्षमा प्राथना पुष्पांजलि और विसर्जन यह पूजा क्रम है
नकारात्मकता समाप्त होगी नई ऊर्जा प्राप्त होगी आत्मविश्वास में वर्द्धि होगी मानसिक शांति प्राप्त होगी बिगड़ते कार्य बन्द होंगे शनि के प्रभाव एवं मंगल दोष में सुंदरकांड का पाठ अचूक माना जाता है यह पाठ जीवन मे आ रही बाधाओ और अटके हुए कार्यो को गति देने में अहम है इसके पाठ से गृहक्लेश व कष्ट से मुक्ति होगी पारिवारिक सुख व स्वास्थ्य लाभ मिलेगा काम करोबार का सामंजस्य लाभ देने वाला होगा विरोधी शांत होंगे|
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