आरती साईबाबा । सौख्यदातार जीवा । चरणरजातली ।
द्यावादासा विसावा, भक्तां विसावा ।। आ० ।।ध्रु०॥
जाळूनियां अनंग । स्वस्वरूपी राहे दंग ।
मुमुक्षुजनां दावी । निज डोळां श्रीरंग । डोळां श्रीरंग ।। आ० ॥१॥
जया मनी जैसा भाव । तया तैसा अनुभव ।
दाविसी दयाघना । ऐसी तुझी ही माव ।। आ० ।।२।।
तुमचे नाम ध्याता । हरे संसृती व्यथा ।
अगाध तव करणी मार्ग दाविसी अनाथा ।। आ० ॥३॥
कलियुगीं अवतार । सगुणब्रह्म साचार ।
अवतीर्ण झालासे ।स्वामी दत्त दिगंबर ।।द०॥आ० ।।४।।
आठां दिवसां गुरूवारीं । भक्त करिती वारी ।
प्रभुपद पहावया । भवभय निवारी ।। आ० ॥५॥
माझा निजद्रव्यठेवा । तव चरणरजसेवा
मागणें हेंचि आतां । तुम्हां देवाधिदेवा ॥आ० ।।६।।
इच्छित दीन चातक । निर्मल तोय निजसुख ।
पाजावें माधवा या । सांभाळ आपुली भाक ।। आ० ।।७।।
आरती साईबाबा । सौख्यदातार जीवा । चरणरजातली ।
द्यावादासा विसावा, भक्तां विसावा ।। आ० ।।ध्रु०॥
साईं बाबा की आरती का विशेष महत्व गुरुवार और साईं बाबा के विशेष उत्सवों में माना जाता है। साईं बाबा करुणा, सेवा और समानता के प्रतीक हैं। उनकी आरती करने से जीवन में श्रद्धा और सबुरी (धैर्य) का भाव विकसित होता है।
नियमित साईं बाबा आरती करने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच बढ़ती है। कठिन परिस्थितियों में मार्गदर्शन मिलता है। घर और कार्यक्षेत्र में स्थिरता और संतुलन बना रहता है।
प्रातः या संध्या समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। साईं बाबा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक, धूप, पुष्प और प्रसाद अर्पित करें। उदी (विभूति) का तिलक लगाएं। श्रद्धा और भक्ति भाव से आरती करें तथा अंत में प्रसाद वितरित करें।
साईं बाबा आरती श्रद्धा और सबुरी का संदेश देती है। सच्चे मन से की गई आरती जीवन में शांति, सुरक्षा और आंतरिक शक्ति प्रदान करती है।
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