जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
गणेश आरती का विशेष महत्व किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में होता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता माना जाता है। उनकी आरती करने से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
नियमित गणेश आरती करने से बुद्धि, विवेक और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। व्यापार, शिक्षा और करियर में सफलता मिलती है। घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। विशेष रूप से गणेश चतुर्थी के दिन आरती करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
प्रातः या संध्या समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक, धूप, फूल और दूर्वा अर्पित करें। मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। श्रद्धा और भक्ति भाव से आरती करें तथा अंत में प्रसाद वितरित करें।
गणेश आरती भक्ति और शुभारंभ का प्रतीक है। श्रद्धा पूर्वक की गई आरती जीवन के विघ्नों को दूर कर सुख, समृद्धि और सफलता प्रदान करती है।
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