अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
तेरे भक्त जनो पर,
भीर पडी है भारी माँ ।
दानव दल पर टूट पडो,
माँ करके सिंह सवारी ।
सौ-सौ सिंहो से बलशाली,
अष्ट भुजाओ वाली,
दुष्टो को पलमे संहारती ।
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
माँ बेटे का है इस जग मे,
बडा ही निर्मल नाता ।
पूत - कपूत सुने है पर न,
माता सुनी कुमाता ॥
सब पे करूणा दरसाने वाली,
अमृत बरसाने वाली,
दुखियो के दुखडे निवारती ।
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
नही मांगते धन और दौलत,
न चांदी न सोना माँ ।
हम तो मांगे माँ तेरे मन मे,
इक छोटा सा कोना ॥
सबकी बिगडी बनाने वाली,
लाज बचाने वाली,
सतियो के सत को सवांरती ।
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
काली माता को शक्ति और समय (काल) की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। उनकी आरती विशेष रूप से अमावस्या, मंगलवार, शनिवार और नवरात्रि में की जाती है। काली माता नकारात्मक शक्तियों का नाश कर भक्तों की रक्षा करती हैं और जीवन में साहस प्रदान करती हैं।
नियमित काली माता आरती करने से भय, तनाव और मानसिक अशांति दूर होती है। शत्रु बाधा और अदृश्य नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा मिलती है। साधक में आत्मबल, निडरता और आध्यात्मिक जागृति बढ़ती है।
प्रातः या रात्रि समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। काली माता की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक, धूप, लाल या काले पुष्प अर्पित करें। नारियल, गुड़ या मिठाई का भोग लगाएं। श्रद्धा और एकाग्रता से आरती करें तथा अंत में प्रसाद वितरित करें।
काली माता आरती शक्ति, निर्भयता और संरक्षण का प्रतीक है। श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई आरती जीवन के संकटों को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा और साहस प्रदान करती है।
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