ॐ कालभैरवाय नमः॥
(विशेष बीज मंत्र)
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ नमः शिवाय॥
ॐ कालभैरवाय नमः भगवान कालभैरव को समर्पित अत्यंत शक्तिशाली और रक्षक मंत्र है। कालभैरव भगवान शिव का उग्र स्वरूप माने जाते हैं, जो समय (काल) के स्वामी और नकारात्मक शक्तियों के संहारक हैं।
इस मंत्र का अर्थ है – मैं भगवान कालभैरव को नमन करता हूँ।
यह मंत्र विशेष रूप से भय, शत्रु बाधा, काले जादू और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा के लिए जपा जाता है।
भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
शत्रु बाधा में कमी
आत्मबल और साहस में वृद्धि
अचानक आने वाली परेशानियों से सुरक्षा
मानसिक स्थिरता और दृढ़ता
यह मंत्र विशेष रूप से कालभैरव अष्टमी और रविवार/मंगलवार को जपना शुभ माना जाता है।
प्रातःकाल या मध्यरात्रि (विशेष साधना में)
108 बार रुद्राक्ष माला से जप
सरसों के तेल का दीपक जलाकर जप करें
श्रद्धा और शुद्ध मन आवश्यक
गुरु मार्गदर्शन में विशेष साधना करें
कालभैरव मंत्र सुरक्षा, शक्ति और साहस का प्रतीक है। श्रद्धा और नियमित जप से जीवन की बाधाएँ, भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। भगवान कालभैरव की कृपा से जीवन में स्थिरता और सुरक्षा प्राप्त होती है।
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