॥ दोहा ॥
श्री रघुवीर भक्त हितकारी।
सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय रघुनाथ कृपाला।
सदा करो संतजन प्रतिपाला॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना।
जासु प्रभाव तिहुँ पुर जाना॥
तव नाम जपत मंगल होई।
संसय रहित भक्त सुख सोई॥
राजिव लोचन मंगल धामा।
सो तुम दीनबंधु सीतारामा॥
जय दशरथ नंदन रघुराई।
सीता सहित हृदय बस जाई॥
भरत लखन शत्रुघ्न सहोदर।
चारों भ्राता प्रेम के सागर॥
वन गमन करि धर्म निभायो।
पितु वचन सिर धरि बन आयो॥
रावण मर्दन लंक विनाशी।
धर्म ध्वजा जग में प्रकाशी॥
सुग्रीवहि राज पद दीन्हा।
विभीषण को लंक दिलीन्हा॥
सेतु बंधि सागर पर कीन्हा।
राम नाम जग में प्रगट कीन्हा॥
अहिल्या उद्धार प्रभु कीन्हा।
शबरी प्रेम अमृत रस लीन्हा॥
केवट प्रीति भक्ति दिखलाई।
दीनन पर करुणा बरसाई॥
तुम हो मर्यादा पुरुषोत्तम।
भक्त जनन के संकट हरतम॥
जो जन राम नाम गुन गावे।
जनम जनम के पाप नसावे॥
श्री राम कृपा बरसावें।
जीवन में सुख शांति पावें॥
॥ समापन दोहा ॥
जो यह पाठ करे मन लाई।
ताप त्रय से मुक्ति पाई॥
सीताराम हृदय में ध्यावे।
सकल सिद्धि नर सहजहि पावे॥
राम चालीसा भगवान श्रीराम की महिमा का वर्णन करने वाली पवित्र स्तुति है। इसका नियमित पाठ करने से जीवन में धर्म, सत्य और मर्यादा का पालन करने की प्रेरणा मिलती है।
हिंदू धर्म में राम को मर्यादा पुरुषोत्तम माना जाता है। वे सत्य, त्याग और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं।
राम चालीसा का पाठ विशेष रूप से मंगलवार, गुरुवार और राम नवमी के दिन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
मानसिक शांति और संतुलन
भय और नकारात्मकता से मुक्ति
पारिवारिक सुख-शांति
धर्म और सदाचार की प्रेरणा
कठिन परिस्थितियों में धैर्य
प्रातःकाल या संध्या समय पाठ करें
राम मंदिर या घर के पूजास्थल में दीपक जलाएं
तुलसी पत्र अर्पित करें
1, 5 या 11 बार पाठ शुभ
श्रद्धा और विश्वास से पाठ करें
राम चालीसा का नियमित पाठ साधक को भगवान श्रीराम की कृपा, शांति और धर्म मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया पाठ जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।
Copyright © 2026 Astrouni | All Rights Reserved