॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥
॥ चौपाई ॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु।
सुनहु विनय महराज प्रभु॥
जयति जयति शनिदेव दयाला।
करहु कृपा भक्तन प्रतिपाला॥
तुम ही काल महाकाल कहावा।
तुम ही सूर्य पुत्र मन भावा॥
नील अंजन सम प्रभु तनु छाया।
शनि स्वरूप सब जग में छाया॥
करहु कृपा हे दीन दयाला।
भक्तन के तुम हो रखवाला॥
दुष्ट दलन संकट हरन।
कृपा करहु सब जनन हित करन॥
तेज तुम्हार जगत में भारी।
सभी चराचर तुमसे डारी॥
जो जन ध्यान तुम्हारा लावे।
सुख संपत्ति जीवन में पावे॥
शनि दशा जब कष्ट बढ़ावे।
भक्त तुम्हारा नाम जपावे॥
साढ़ेसाती दुख हर लेहो।
श्रद्धा से जो शरण में आओ॥
रोग शोक सब दूर भगावो।
भय संशय मन से हटावो॥
न्याय प्रिय तुम धर्म अधीसा।
भक्तन के हित सदा प्रतीसा॥
जो यह पाठ करे मन लाई।
ता पर कृपा करहु अधिकाई॥
॥ समापन दोहा ॥
शनि चालीसा जो कोई गावै।
दोष क्लेश सब दूर भगावै॥
भक्ति भाव से ध्यान जो धरे।
सुख समृद्धि जीवन में भरे॥
शनिदेव न्याय के देवता माने जाते हैं। वे कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। शनि चालीसा का पाठ शनि दोष, साढ़े साती और ढैया के प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है।
विशेष रूप से शनिवार के दिन इसका पाठ अत्यंत फलदायी होता है।
साढ़े साती के प्रभाव में कमी
शनि दोष शांति
जीवन में स्थिरता और अनुशासन
न्याय और कर्मफल में संतुलन
बाधाओं और संकटों से मुक्ति
शनिवार प्रातः या सूर्यास्त के बाद पाठ करें
काले तिल और सरसों के तेल का दीपक जलाएँ
पीपल वृक्ष के नीचे पाठ करना शुभ
11 या 21 बार पाठ विशेष फलदायी
शनि मंत्र का जप साथ में करें
शनिदेव चालीसा का नियमित और श्रद्धापूर्ण पाठ जीवन में अनुशासन, न्याय और सकारात्मक परिवर्तन लाता है। सच्चे मन से की गई प्रार्थना शनि कृपा प्राप्त करने का मार्ग खोलती है।
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