Sai Chalisa

Sai Chalisa

॥ दोहा ॥

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार।
बरनउँ रघुवर बिमल जस, जो दायक फल चार॥

॥ चौपाई ॥

जय जय जय साईं भगवान।
करहु कृपा तुम दीनन प्राण॥

शिरडी धाम के तुम अधिकारी।
भक्तन के संकट हरन हारी॥

तुम हो दयालु कृपालु स्वामी।
भक्त जनन के अंतरयामी॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ाएँ।
भक्त भाव से तुम्हें मनाएँ॥

दीन दुखी के तुम रखवारे।
सर्व रोग हर, कष्ट निवारे॥

अन्न दान औषधि दाता।
दरिद्र जनन के तुम विधाता॥

उदी देकर रोग मिटाए।
संकट समय सहायक आए॥

जो श्रद्धा से दर पर आवे।
मन वांछित फल वह नर पावे॥

सबका मालिक एक बतावा।
सत्य प्रेम का मार्ग दिखावा॥

हिंदू मुस्लिम एक समान।
सबमें देखा एक ही प्राण॥

अन्न क्षेत्र तुमने चलवाया।
भूखे जन को अन्न खिलाया॥

दक्षिणा ले प्रेम सिखाया।
ममता मोह से दूर कराया॥

तुमने पानी से दीप जलाया।
अपना चमत्कार दिखलाया॥

भक्तन पर जब संकट आवे।
साईं नाम तुरंत बचावे॥

जो यह पाठ करे मन लाई।
दुख दरिद्र निकट नहिं आई॥

साईं कृपा जिस पर होई।
जीवन सुखमय उसका होई॥

॥ समापन दोहा ॥


साईं चालीसा जो पढ़े, श्रद्धा सहित विचार।
संकट कटे, मिले सुख, हो भवसागर पार॥

साईं चालीसा का महत्व


साईं बाबा को करुणा, प्रेम और सेवा का प्रतीक माना जाता है। वे शिरडी के संत थे जिन्होंने मानवता, सद्भाव और विश्वास का संदेश दिया।

साईं चालीसा का पाठ विशेष रूप से गुरुवार के दिन अत्यंत फलदायी माना जाता है।

आध्यात्मिक लाभ


मानसिक शांति और संतोष

कष्टों से मुक्ति

जीवन में मार्गदर्शन

आर्थिक और पारिवारिक स्थिरता

विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि

पाठ विधि


गुरुवार को स्नान के बाद पाठ करें

पीले या सफेद वस्त्र धारण करें

साईं बाबा को फूल, नारियल और मिठाई अर्पित करें

11 बार पाठ विशेष फलदायी

“ॐ साईं राम” मंत्र का जप करें

निष्कर्ष


साईं चालीसा का नियमित और श्रद्धापूर्वक पाठ करने से साईं बाबा की कृपा प्राप्त होती है। सच्चे मन से की गई प्रार्थना जीवन में शांति, सुरक्षा और सफलता प्रदान करती है।

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