ॐ वाग्देव्यै विद्महे
कामराजाय धीमहि।
तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
(एक अन्य प्रचलित रूप)
ॐ सरस्वत्यै विद्महे
ब्रह्मपुत्र्यै धीमहि।
तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
सरस्वती गायत्री मंत्र ज्ञान, बुद्धि और कला की देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए जपा जाता है। यह मंत्र विशेष रूप से विद्यार्थियों, शिक्षकों, कलाकारों और रचनात्मक कार्य करने वालों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
माँ सरस्वती को विद्या, वाणी और संगीत की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। यह मंत्र विशेष रूप से सरस्वती की दिव्य ऊर्जा को जागृत करने के लिए जपा जाता है।
गायत्री छंद में रचित यह मंत्र मन, वाणी और बुद्धि को शुद्ध करता है।
आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक लाभ
पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है
स्मरण शक्ति मजबूत होती है
वाणी में मधुरता आती है
रचनात्मकता और कला में वृद्धि
परीक्षा और प्रतियोगिता में सफलता
मानसिक स्पष्टता और आत्मविश्वास
प्रातःकाल या पढ़ाई शुरू करने से पहले जप करें
वसंत पंचमी के दिन विशेष फलदायी
सफेद या पीले आसन पर बैठें
108 बार (1 माला) जप करना श्रेष्ठ
माँ सरस्वती की प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर जप शुभ
सरस्वती गायत्री मंत्र का नियमित जप साधक को ज्ञान, बुद्धि और सफलता प्रदान करता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक जप करने से शिक्षा और करियर में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।
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