बीज मंत्र
ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः॥
मूल मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं भुवनेश्वर्यै नमः॥
माँ भुवनेश्वरी को दस महाविद्याओं में चौथा स्वरूप माना जाता है। वे संपूर्ण ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री शक्ति हैं और सृष्टि, पालन तथा संरक्षण की दिव्य ऊर्जा का प्रतीक हैं।
हिंदू परंपरा में भुवनेश्वरी को जगत जननी और सर्वव्यापी चेतना का स्वरूप माना जाता है। उनका मंत्र साधक को मानसिक शांति, आत्मबल और आध्यात्मिक जागृति प्रदान करता है।
यह मंत्र विशेष रूप से शांति, स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए जपा जाता है।
मानसिक शांति और संतुलन
आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति
नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा
घर-परिवार में सुख-शांति
आध्यात्मिक जागरूकता में वृद्धि
ध्यान में गहराई
प्रातःकाल या रात्रि ध्यान के समय जप करें
शुक्रवार या पूर्णिमा विशेष फलदायी
लाल या पीले आसन पर बैठें
108 बार (1 माला) जप करना श्रेष्ठ
माँ भुवनेश्वरी की प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर जप शुभ
भुवनेश्वरी मंत्र श्रद्धा और नियमपूर्वक जप करने से साधक को दिव्य संरक्षण, मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है। नियमित जप जीवन में संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
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