गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु
गुरु देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म
तस्मै श्री गुरवे नमः॥
(यदि ज्योतिष अनुसार बृहस्पति देव का मंत्र भी जोड़ना हो तो)
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः॥
गुरु मंत्र ज्ञान, मार्गदर्शन और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। इस मंत्र में गुरु को सृष्टि के तीनों स्वरूप – ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान माना गया है।
हिंदू धर्म में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है क्योंकि गुरु ही अज्ञान के अंधकार से ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। यह मंत्र विशेष रूप से बृहस्पति (देवगुरु) से भी संबंधित माना जाता है, जिन्हें ज्योतिष में ज्ञान और भाग्य का कारक ग्रह माना जाता है।
बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि
निर्णय क्षमता मजबूत होती है
शिक्षा और करियर में सफलता
विवाह और संतान सुख में सहायता
गुरु ग्रह (बृहस्पति) को मजबूत करता है
जीवन में सही मार्गदर्शन प्राप्त होता है
गुरुवार के दिन जप विशेष फलदायी
प्रातः स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करें
पीले आसन पर बैठकर जप करें
108 बार (1 माला) जप करना शुभ
केले के वृक्ष या विष्णु भगवान के समक्ष जप श्रेष्ठ
गुरु मंत्र का नियमित जप व्यक्ति को आध्यात्मिक शक्ति, ज्ञान और जीवन में सही दिशा प्रदान करता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ जप करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव होते हैं।
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